Hindi Kavita – संयम | Kaavyalaya – Poems that Touch the Heart – by Sadhna Jain

संयम is a Short Hindi Kavita on Life written by Sadhna Jain.

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संयम

अंहिसा यदि चाहो जग मे, तो संयम को अपना लो तुम,
शांत तन और शांत मन से, स्वस्थ समाज की नींव धरो,

अहंकार और स्वार्थ बढे, तो विवेक कही छिप जाता है,
पर संयमधारी प्राणी का जीवन, मदमस्त पवन का झोंका है,
 
अपराध और भ्रष्टाचार की दीमक, आज जीवन बगिया को निगल रही,
बाहरी जगत के आकर्षण की, तेरी आंखो पर, अब भी क्यो पट्टी बंधी,
 
ज्यों-ज्यों जीवन के पथ पर, प्राणी तेरे कदम बढे, सुख-दुख भी घटते-बढते है,
अज्ञानी ये देख के रोए, ज्ञानी इसे प्रभु की लीला कहे,
 
सत्ता और अधिकार शब्द, सदैव ही संघषो के निमित्त बने,
जीवन-पथ पर वही बढा है, संयम, तपस्या, साधना जिनके संग चले,
 
नदी सरीखा मानव जीवन, एक दिन प्रभु सागर मे मिल जाएगा,
छल-कपट का मैल भरा इसमे, संयम की छलनी से ही छन पाऐगा,
 
                                                                                          

Kaavyalaya is a Hindi Kavita Sangrah or Hindi Kavita Kosh comprising Hindi Kavitayein by Sadhna Jain. Kaavyalaya is a collection of Hindi Kavita on Life, Hindi Kavita on maa, Hindi Kavita about Nature & many more.

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